Sonali Mudgal
Literary Captain11Followers
2Following
4Works
ख़ानाबदोश ज़िंदगी मे, सौ ख़वाहिशे घर बनाने सी | लिखा है किसी पे बीती कहानी को, हाज़िर हैं शब्दों से हाथ आज़माने को | हर भाव होता है सभी इंसानों में, होना बयां मेरे शब्दो में बाकी है तकल्लुफ़ कीजिये मेरा लिखा पढ़ने का, पड़ना नज़र उस्ताओं की अभी बाकी है || कृपया अपनी टिप्पणी जरूर लिखें | आपकी टिप्पणी मेरे लेखन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
No stories yet.