by Naveen Kumar ✓
बचपन में मैं, जब रूठ जाया करता था लोगों के तानों से, टूट जाया करता था बंद कमरे में, वो दीवार से टँगा, बस मुझे निहारता था याद है मुझे, मैं उसे कितना सुनाया करता था
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