by मोहनजीत कुकरेजा (eMKay) ✓
कोशिशें मुसलसल हैं अगर, ख़्वाब अधूरे रहेंगे क्यों ? मंज़िल चल के क़रीब आएगी, तुम अगरचे ठान लो !
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