120Log inSign up
Audio · others

पता नहीं...

by मोहनजीत कुकरेजा (eMKay) ✓

0Reads
0Likes
1Min read

गले में टांग रखी है पते की एक तख़्ती... बे-ख़बरी इतनी, रहता कहाँ है पता नहीं !

Loading comments…