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शबाब और शराब

by Sonam Kewat ✓

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'मै प्यास हूँ कुछ हवश को बुझाने की, एक शबाब दिल की दूजी शराब महखाने की।' शर्ब और शबाब दोनों ही इन्सान को नशीला बना देती है।

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