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#अंग
56 poems
कच्ची दीवाल
Neelam Chawla · 1 min read · 230 reads
पर हम है बस दो कच्ची दिवाल पक्की सी।
Abstract
आने दो दुनिया में उसको
Priti Ag Surana · 1 min read · 223 reads
बेटी उपहार है ईश्वर का, कंधों का बोझ नहीं।
Inspirational
हिंद की माटी....
निखिल कुमार अंजान · 2 min read · 537 reads
आतंकवाद नामक संक्रमित रोग न फिर कभी दोबारा होगा मेरे जाने के बाद बस इतना मेरा काम करना
Inspirational
आग
Amitav Sahu · 1 min read · 303 reads
ये आग सारे और सबकुछ पंचतंत्र के एक अभिन्न अंग है जो पवित्रतम है इंसान सिर्फ रूप देता
Abstract
कठपुतली
Nanda Pandey · 1 min read · 24.5K reads
कठपुतली के अंदर की पीड़ा कसती है फंदे हम सबके गले में।
Romance
क्या बुरा काम किया ?
Sumit Malhotra · 1 min read · 58 reads
थक कर चूर हो गया ये शरीर का हर अंग, फिर भी जाने कहां तक चलना है।
Classics
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