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#अमन
73 poems
कोतवाली
Sanjay Pathade Shesh · 1 min read · 149 reads
कर रहे हैं वे शहर की इस तरह रखवाली
Others
लोक व्यवहार नेग रिवाज
Sandeep Kumar · 1 min read · 264 reads
जो बोलना हो खुल कर बोलो ऐसा तो कोई रिवाज नहीं।।
Others
हिन्दी कविता-हार न जीत का जश्न
Shyam Kunvar Bharti · 1 min read · 153 reads
मिटाकर गीले शिकवे बन के भाई आओ भजन करें । सदियो रहे मिलके आगे भी दस्तूर ये ज़िंदा रहे
Others
'वसुधैव कुटुम्बकम्'
मानसिंह राठौड़ · 1 min read · 413 reads
जात-पात के भर्म को तोड़, एक-एक को गले लगाते चलें । सबको साथ में लेकर यहाँ, कदम से कदम
Abstract
रोटी मेरे बिना खाती नहीं कभी
Amandeep Singh · 1 min read · 263 reads
यूँ सोचता रहा मैं रात भर अमन ये रात क्यों गुज़र जाती नही कभी।
Drama
गणतंत्र दिवस पर
Vikram Singh Negi 'Kamal' · 1 min read · 303 reads
गीत गाता हर हिन्दुस्तानी हो, जब तक जन गण मन रहे..जब तक जन गण मन रहे..।।
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