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42 poems
माँ
Anita Jha · 1 min read · 3.1K reads
माँ तुम आ जाओ पास हमारे घर आगंन का दीप जला, बादलों में क्यूँ छिप जाती हो
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ऋतुओं का राजा बसंत
Laxmi Sharma · 1 min read · 169 reads
हवाओं ने छेड़े है मधुरिम तराने यूं लगे मास मधुमास का आ रहा है।
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ये पवन
Anjana Chhalotre · 1 min read · 223 reads
पर्वतों पर चाँँदनी बिछने लगी शीत ऋतु का आगमन है मेघ मंडराने लगे हैं घाटियों में पवन
Romance
जीना आ गया
K M · 1 min read · 292 reads
अपनों की रुसवाई भी जब न खटके दुःख सहन करके भी शरीर न थके तब समझिए जीना आ गया।
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ऐ परिंदे
RAJ KUNWAR DUBEY · 1 min read · 200 reads
ऐ परिंदे कभी नीचे आसमान से आ वक्त हो तो घर मेरे किसी शाम को आ,
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मैं आ रहा हूँ...
Asima Bhatt · 1 min read · 14.2K reads
मैं आ रहा हूँ...
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