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#ऋतु
66 poems
नित ये अनुरागी मन तरसे
Ritu Khatiwala · 1 min read · 6.9K reads
निस दिन नैना राह निहारें, दिन अश्रु से बहते जाऐं मन की हिलोरें तुम्हें पुकारें घड़ी-घड़ी ये उठती जाऐं
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विभावरी में खिली कोंपल
Ritu Khatiwala · 1 min read · 7.1K reads
विभावरी में खिली कोंपल देख आसमान को, मुस्कुरा रही थी;
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शिव के ब्याह की रात
Ritu Khatiwala · 1 min read · 13.6K reads
जाने कितनी बार गौरी को मनाया था मुझे हठी बालक की तरह परे कर बैठी
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जाड़े की आहट
मुकेश बोहरा अमन · 1 min read · 586 reads
जाड़े की आहट , आने लगी है । फिजां में मोहब्बत, छाने लगी है।
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बेमानी ऋतु
Pooja Agrawal · 1 min read · 157 reads
तुम सावन की बूंद
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एक अनुभूति
Ritu Khatiwala · 1 min read · 7.2K reads
एक अनुभूति, एक कल्पना, हर क्षण वही झंकार,
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