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#कण
93 poems
पितरों को सादर स्मरण
Amit Tiwari MEET · 1 min read · 228 reads
पुरखे जगत से कभी विदा नहीं होते , संतति के कण कण में रचे बसे होते हैं!
Inspirational
चन्द्रमिशन से प्रेरणा प्राप्त
gyayak jain · 1 min read · 189 reads
वह सारे जहाँ से अच्छा, है हिन्दुस्तां हमारा।
Drama
बारिश और तुम
Shalinee Pankaj · 1 min read · 171 reads
कब आएगा मेघ इस इंतजार में मूंद लेती है कुछ पल को पलकें
Others
मुझे हारना पसंद नहीं
Bhavna Thaker · 1 min read · 548 reads
एक बार अहसास में बसकर कह दो ना तुम जिताओगे मुझे! कर दोगे न उल्टा इस नीचे गिरती रेत के उदास कणों को
Others
त्याग की मूरत
Ashish Agrawal · 1 min read · 533 reads
आदतों को बदला, चाहतों को बदला, भले मेरे अरमानों ने,अपनी करवट को बदला
Tragedy
भोर
Anshu Shri Saxena · 1 min read · 135 reads
देगा नई उम्मीदें, खोलेगा सुख के द्वार।
Classics
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