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#कमी
127 poems
स्वागत कर जो घड़ी पड़ी है
gyayak jain · 1 min read · 250 reads
क्या करूँ मैं निंदा पर की, अपने ही जब वक्त बदलते।
Tragedy
इमोशनल अत्याचार
manisha sinha · 1 min read · 512 reads
अगर प्यार इसे कहते हैं तो, “इमोशनल अत्याचार “की परिभाषा क्या है।
Abstract
पवित्रता का प्रमाण-पत्र
Shashi Rawat · 2 min read · 531 reads
इस दकियानूसी परीक्षा को देते रहेगे खुद की इज्जत को
Tragedy
मेरी कमी !
S Ram Verma · 1 min read · 180 reads
क्या तुम्हें मेरी कमी बिलकुल नहीं खलती है !
Abstract
वक़्त
अभिषेक कुमार 'अभि' · 1 min read · 260 reads
उसके बारे में सोच हासिल ही क्या ? जो वक़्त हाथों से निकला, चला गया।
Abstract
बिन फेरे हम तेरे
Ajay Prasad · 1 min read · 188 reads
फ़िर न बसा दिल में कोई तेरे बाद अजय शायद इसे ही कहते बंदगी है।
Romance
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