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#कलम
603 poems
फर्ज की जंग
Manish Sharma · 1 min read · 141 reads
तभी हम कोरोना को हराकर, हँसी खुशी ये जीवन बीता पायेंगे।
Others
अब किस बात का झगड़ा जी
Manish Sharma · 1 min read · 454 reads
तभी एक आवाज मेरे कानों में आती है अजी सुनते हो कपड़े धोना भी बाकी है।
Comedy
अमृत कलश
Manish Sharma · 1 min read · 307 reads
यह मिट्टी का मटका भी अमृत कलश बन जाता है।
Inspirational
कलम की ताकत
मिली साहा · 2 min read · 329 reads
बुद्धि, विवेक पर डालकर प्रकाश हमें पाठको के समक्ष प्रस्तुत करती है।
Abstract
ढीठ कौन मैं या स्याही?
Sudhanshu Raghuvanshi · 1 min read · 250 reads
एक शिद्दत से, एक लम्बे इंतज़ार के बाद बिल्कुल मेरी तरह
Romance
तटस्थ
Shailaja Bhattad · 1 min read · 595 reads
न विचलित होकर, न फासले बढ़ाकर बात करना है तो रंजिशों को मिटाकर।
Inspirational
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