Story
Mirror
Home
Stories
Poems
Quotes
Series
Library
Write
English
हिन्दी
বাংলা
ગુજરાતી
मराठी
ଓଡ଼ିଆ
தமிழ்
తెలుగు
ಕನ್ನಡ
മലയാളം
120
Log in
Sign up
Loading…
StoryMirror - Read, Write, Share & Repeat
#कलह
8 poems
एक ऐसी सुबह
Dr Shikha Tejswi ‘dhwani’ · 1 min read · 320 reads
एक सुबह जब देर होने पर भी, बिलकुल नहीं हम बड़बड़ायें।
Others
कुछ तो सीखें
Pawanesh Thakurathi · 1 min read · 150 reads
निज भाषा को अपनायें निज संस्कृति के मोती पायें
Inspirational
ज़ुल्म और जुर्म
Shivankit Tiwari "Shiva" · 1 min read · 402 reads
जुल्म और जुर्म में बताते थे जो कभी अंतर, अब जुर्म कर रहे वो और जुल्म सह रहे हैं वो।
Tragedy
वाह ! पुरुष क्या सोच तुम्हारी
Sonias Diary · 1 min read · 7.4K reads
सलाम, तेरी समझ को सलाम, तेरे गुरूर को वाह ! पुरूष क्या सोच तुम्हारी।
Drama
यह मकान बिकाऊ है
"निर्मूणी"@साहित्यिक कर्नल "संजीव कुमार मुर्मू" · 2 min read · 305 reads
मुहल्ले ना पहली बार कुटुंब में कीच कीच कबीलों नई कलह
Abstract
सही आदमी और मैं ( दो कविताएं )
Er. Pashupati Nath Prasad · 2 min read · 405 reads
दुष्ट सोचे सदा है कलह के लिए, विष सोचे हमेशा मरण के लिए,
Inspirational
Loading…
Next page →