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#कलि
5 poems
शब्दों के मोती
Baburam Shing kavi · 1 min read · 359 reads
कलि में कैसे धर्म बचेगा, अस्त -व्यस्त संसार हुआ है।
Abstract
तुम बिन मैं कुछ नहीं हूं मां
Sambardhana Dikshit · 1 min read · 182 reads
तुम बीज हो मैं फल हूं मां तुम समुद्र हो मैं लहरें हूं मां
Others
कली
sudhakar sethi · 1 min read · 32 reads
सूरज चाचा मुस्कराते आ के खड़े हो जाते है
Children
चिर प्रतीक्षित ऋषि नयन है
अच्युतं केशवं · 1 min read · 187 reads
चिर प्रतीक्षित ऋषि नयन है, पल रहा सपना युगों से। हरि पुनः अवतीर्ण होकर, तार देंगे सब दुखों से।
Abstract
डर लगता है साहब!
Yudhveer Tandon · 1 min read · 229 reads
खिलने से पहले ही कली की कहीं कोई दबा न कोख दे
Tragedy