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#के
1501 poems
सुलह
Bhawna Kukreti · 1 min read · 232 reads
गहराती जा रही है रात, बात कर लें। शिकवे जो रहे गुस्ताख, राख कर लें।
Romance
वर्षा ऋतु
Deepa Joshi · 2 min read · 7.3K reads
इस कविता में मैंने वर्षा ऋतु का स्वागत अलग अलग लोगों द्वारा कैसे किया जाता है और अपने अंतरमन के विचारों को दर्शाया है।
Others
सृजन के अधिकारी
Ram Chandar Azad · 1 min read · 12K reads
श्रमदान और कर्मदान की तुम ही जीवित मूरत हो।
Tragedy
कैनवास के रंग..
Kaushal Upreti · 1 min read · 13.5K reads
कैनवास के रंग..
Others
बरगद की छांव
Shraddha Gaur · 1 min read · 147 reads
भीड़ भरती थी भारी, कभी शाम को तो कभी भरी दुपहरिया में, कुछ चेहरे अनुभावों वाले चांदनी
Others
सावधानी हटी, दुर्घटना घटी
नविता यादव · 2 min read · 407 reads
दुपहिया वाहन चल रहा, लेकर तीन सवारी लंबा रास्ता, पैट्रोल की टंकी फुल उसपे मोबाइल में
Tragedy
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