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#खौफ़
29 poems
एक आदमी
Dr. Dharmendra Mulherkar · 1 min read · 1.5K reads
सफाई की गंगा अब बहने लगी है पता नहीं क्या जादू है उस नाम में, तैरने लगी पानी पे, काम की गाथा है
Inspirational
किस्मत के रंग
Ajay Singla · 1 min read · 321 reads
जिन आँखों में हर वक्त रहती थी ख़ुशी और चमक, उन आँखों को रिमझिम बरसते हुए देखा है...
Tragedy
मन समुन्द्र
Sunil Yadav · 1 min read · 1.4K reads
मन में बहते झीलों को जब समुद्र समझा, तब अपने अंदर ख़ौफ़ का मंजर समझा
Inspirational
स्त्री
Rashi Singh · 1 min read · 6.9K reads
है दूर किनारा जीवन का अभी जाने कितनी दफ़ा मैं भटकी हूँ, पीड़ा का आभूषण कर धारण , गिरती और कभी सँभलती हूँ
Inspirational
बेदर्दी फ़ितरत
गोविंद ठोंबरे · 1 min read · 6.8K reads
मगर कोई ख़ौफ़ लेकर आया है भिन्नता को लेकर आग लहू बन सताया है विचित्रता अब कितनी भर आयी है
Others
||"खौफ़"||
Shakuntla Agarwal · 1 min read · 211 reads
गुलाबी ठंड का ख़ुमार , आँगन में पसरी धूप , अलसाई नज़र , मुंदती आँख में चुभता काज
Others
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