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#गया
71 poems
बेटा जीत गया
Hasmukh Amathalal · 1 min read · 7.1K reads
मानो लूट का माल बहार नहीं जाने देना है कोई सर उठाये तो बस सर कलम कर देना है।
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कल गया, कल की तरह
Rajkumar Kumbhaj · 1 min read · 1.4K reads
कल गया, कल की तरह
Others
लड़कपन सा वो बचपन
gyayak jain · 1 min read · 324 reads
एक मासूमियत थी, जो कुछ तो अलग थी पर साथ थी शरारतें, और बहुत सी बदमाशियाँ। खो गयी
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खुदा का आसरा
धर्मेन्द्र अरोड़ा "मुसाफ़िर" · 1 min read · 285 reads
जब ख़ुदा का मुझे आसरा मिल गया लोग कहने लगे जाने क्या मिल गया
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कमाल हो गया
Shubham Pandey gagan · 1 min read · 202 reads
मेरा अब थक के गिर जाना आम हो गया फिर से रस्ते पे लग जाना भी कमाल हो गया
Abstract
जीना आ गया
K M · 1 min read · 292 reads
अपनों की रुसवाई भी जब न खटके दुःख सहन करके भी शरीर न थके तब समझिए जीना आ गया।
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