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#गर्भ
59 poems
उठ खड़ा हो...
हिमांशु उनियाल पण्डित · 1 min read · 342 reads
उन घटनाओं से ऊर्जा ले उठ खड़ा हो। दिन में तारों का कोई महत्त्व नहीं अंधेरा है जीवन में तो, तारों जैसे तिमिर में ही चमकने के
Inspirational
पिया
Rinki Raut · 1 min read · 204 reads
बंद दरवाज़ा देखकर लौटी है दुआ।
Abstract
गर्भ
Archna Goyal · 1 min read · 343 reads
इन नवपीढ़ी ने इसे हमारा अपमान बना दिया।
Abstract
हत्या
नीलम पारीक · 1 min read · 219 reads
ख्वाहिशों कि अरमानों कि हत्या तो हत्या ही है न।
Tragedy
भ्रूणों पर संकट है
Dr J P Baghel · 1 min read · 164 reads
परशुराम का बल इतना है, जो आड़े आएगा जिंदा बचा हुआ है जो भी वह मारा जाएगा।
Tragedy
नन्ही कली
Manu Sweta · 1 min read · 485 reads
पापा की नन्ही कली
Tragedy
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