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#गाय
38 poems
चलो उठो अब जाग जाओ
Nirupama Naik · 1 min read · 691 reads
बिस्तर से उठकर तुम जल्दी नूतन ऊर्जा करो प्राप्त।
Abstract
आईना दिखाया
Alka Nigam · 1 min read · 245 reads
होम करते ख़ुद का हाथ ही जल दिया।
Drama
एक जंगल स्याह काला था
Hilal Hilal · 1 min read · 546 reads
थे देशभक्त फिर भी वो सारे, उस जंगल का कानून बड़ा निराला था।
Abstract
खूंटे से बंधी गाय
Nisha Nandini Bhartiya · 1 min read · 262 reads
मैं नारी हूँ मैं पत्नी हूँ जग की सेविका हूँ मैं परिचारिका हूँ, क्योंकि मैं खूंटे से बंधी गाय हूँ।
Others
साँझ
Bharti Bourai · 1 min read · 363 reads
इसी से बेहद पसंद है साँझ और साँझ की लालिमा !
Abstract
घर हो ऐसा
Swapnil S · 2 min read · 331 reads
हो पुरखो की याद वाली कुछ पुरानी चीज़े
Inspirational
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