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#छल
93 poems
नवसंचार
नविता यादव · 1 min read · 288 reads
प्रातः काल भास्कर रश्मि कर गई रोशन जहां चिड़ियों की चहचहाहट,मधुर कर गई जहां,
Others
जिंदगी की शतरंज
निखिल कुमार अंजान · 1 min read · 593 reads
राजा शान से खड़ा है प्यादा ही बे मौत मरा है छल से भरे इस खेल मे हर पल ख़तरा ही ख़तरा है
Inspirational
ठग
Navin Madheshiya · 1 min read · 239 reads
मैं चला था लोगों को ठगने पर यहां लगा है भावों का बाजार अब पुनः वापस आकर बैठ गया अब खुद को ठगा महसूस कर रहा हूं
Others
कैसा है ये प्यार ?
SIJI GOPAL · 1 min read · 330 reads
तुमसे प्यार किया इसलिए मैं खुद से नफरत करता हूँ।
Tragedy
नदी की आत्मकथा
Dr. Richa Sharma · 1 min read · 413 reads
तेरी करतूतों के आगे गई हूँ हार मुझे बचाकर कर अपना जीवन साकार।
Abstract
Rishto ki potali
Richa Joshi · 1 min read · 344 reads
बहुत भारी सी रिश्तों की पोटली।
Drama
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