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#जखम
3 poems
औरत
Shakuntla Agarwal · 1 min read · 218 reads
इसी गुथी को सुलझाती रहती है वो ! हया का पर्दा कहीं सरक न जाए,
Abstract
चेहरा
सागर जी · 1 min read · 202 reads
मैंने तुम्हारी आंखों में वफ़ा देखी है, मेरे प्रति छुपी, प्रेम की हया देखी है। नज़रें, जैसे कुछ कह रही थी मुझसे, मेरे लिए तड़पती हैं, कह रही थी मुझसे।
Romance
*फीकी तबस्सुम
Pushpendra pal Sanam · 1 min read · 4K reads
इस फीकी तबस्सुम में लिपटे हुए हम कुछ खोने का ग़म कुछ पाने की आश में डूबे हुए हम।
Romance