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#जड़
29 poems
बरगद की छांंव
Preeti Sharma "ASEEM" · 1 min read · 192 reads
मां बाप बरगद की छांव से हमेशा हरे रहते हैं।
Abstract
आँगन की तुलसी
Ravi Purohit · 1 min read · 428 reads
अचानक भरोसा लिपट पड़ा पांवों में बूढ़ाती उम्र ठट्ठा कर हँस पड़ी
Drama
अध्यात्म की खाद
Sunita Katyal · 2 min read · 228 reads
वृक्ष के जड़ की तरह भावुकता का संबंध पल्लवों से।
Drama
भारत का राष्ट्रीय फूल
Jalpa lalani · 1 min read · 502 reads
यही सीख मिलती हमें कमल से कैसे भी हालात हो खुशियां बांटे दिल से।
Drama
मेरी आस !
S Ram Verma · 1 min read · 304 reads
पास आकर मेरे इन अंधेरों में, क्यों इसे रौशन करता नहीं है !
Abstract
ये किस मोड़ पे आ गयी ज़िन्दगी
Anita Purohit · 1 min read · 400 reads
ना मोहब्बत का उफ़ान ना नफ़रतों का सैलाब कोई ना क़रार ही दिल में ना बेक़रारी ही कोई।
Tragedy
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