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#जहर
127 poems
हो रहा है विनाश धीरे धीरे
Jagdish Pandey · 1 min read · 20.3K reads
हो रहा है कैसा आज असर धीरे धीरेइंसानियत उगल रहा जहर धीरे धीरेविवश हो प्रकृत भी प्रलय की आड मेंढा रहा है वो भी अब कहर धीरे धीरे
Others
पानी बचाओ
बोधन राम निषाद राज · 1 min read · 348 reads
करना तुम बर्बाद नहीं, नहीं लौट के आय।
Inspirational
इश्क़ कहर है ?
Jayantee Khare · 1 min read · 269 reads
बैचैनी और बेसुक़ूनी बेआरामी बेबसी, मोहब्बत में मिलते हैं
Romance
मैं पानी की क्यारी हूँ
Vijay Kumar उपनाम "साखी" · 1 min read · 222 reads
अमृत पीकर वो लड़ते हैं, हे ख़ुदा मैं इन इंसानो से, इन हैवानो से हारी हूं
Tragedy
एक और एक ग्यारह हो
राही अंजाना · 1 min read · 359 reads
नाम होकर भी ये राही तो बस अंजान लगता है।
Abstract
स्वागत
Sneh Goswami · 1 min read · 179 reads
मैं यादों के किसी भी पत्र विहीन जंगल में नहीं घूम सकती।
Abstract
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