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#जाल
110 poems
चुनावी बयार
सीमा भाटिया · 1 min read · 225 reads
वक्त बचा बहुत कम फैला कारोबार है तानों उलाहनों की मची भरमार है
Others
उलझन
Sunita Nandwani · 1 min read · 352 reads
वो जो उलझन बहुत देर से उलझी थी मेरे मन से।
Abstract
वसुधैव कुटुंबकम् --
Rati Choubey · 1 min read · 181 reads
बनों "वृक्ष " से दानवीर खुद भूखा रह फल देता "बादल" से बन जाओ तरल खुद भूखा रह , बरस
Abstract
मयखाना
बिमल तिवारी · 1 min read · 200 reads
सब सुलझ जाता हैं जब दर मयखाने होता हूँ।
Drama
प्रेमिका
Ira Johri · 1 min read · 426 reads
प्रेमी बन प्रेम जाल फैला कर मुझे फँसाया विरह में तेरे मैने विरहनी सा जीवन बिताया।
Abstract
व्हाट्सएप की वितृष्णा
Lakshman Jha · 1 min read · 236 reads
इस तरह हम शायद ही निकल पाए भ्रांतियों के जाल से !
Drama
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