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#जड़
23 poems
हे शंकर आओ धरा पे.....
निखिल कुमार अंजान · 1 min read · 261 reads
सत्य को बचाओ धरा पे
Classics
हिन्दी हमारा मान
Babita Consul · 1 min read · 187 reads
सरल, सहज भाव है हिन्दी विकास की भाषा हिन्दी अभिव्यक्ति की भाषा हिन्दी
Inspirational
बोनसाई : औरत
Manju Mahima · 1 min read · 466 reads
औरत तो सदियों पहले ही बोनसाई बना दी गई थी,
Classics
बेटियाँ
अंजना बख्शी · 1 min read · 308 reads
बेटियाँ धान-सी होती हैं पक जाने पर जिन्हें कट जाना होता है जड़ से अपनी
Others
माँ
anita rashmi · 2 min read · 304 reads
माँ कभी भी केवल माँ नहीं रहती वह भाई-बहन, पिता-दादा दादी-नानी और न जाने क्या-क्या बन अनाम रिश्तों में जी लेती है
Inspirational
पोषण
Anju Motwani · 1 min read · 411 reads
नव जन्मी कोंपलों के स्वागत में मंगल गान गाती हवा के झोंकों के साथ उन्हें झूला झुलाती लोरी सुनाती
Inspirational
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