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7 poems
भ्रष्टाचार
Reena Goyal · 1 min read · 264 reads
विधा : सरसी छन्द गीत
Abstract
तुम कुछ नहीं कर सकते !
VIVEK ROUSHAN · 1 min read · 558 reads
पानी पीता हूँ और सो जाता हूँ ये भूलकर की कल क्या होगा ?
Abstract
टेबल
Bilal Ali Khan · 1 min read · 42 reads
एक टेबल ऐसी हो जिस पर कोई बोझ न हो... अब क़लम रखें या रखें किताब ये आपकी मर्ज़ी....
Abstract
चाय और तुम
Sonam Kewat · 1 min read · 462 reads
आज पहली बार चाय टेबल पर छोड़ दिया क्योंकि तुम मिलने को तैयार थी।
Romance
मदारी
Pradeep Sahare · 1 min read · 289 reads
लेकर क्षण भर श्वास, थोड़ी सुकून की। सुनता फिर, बॉस के मन की।
Fantasy
घर
Dheerja Sharma · 1 min read · 318 reads
जहाँ दीवारों से सफेदी झड़ती थी पर अम्मा बाबू से न लड़ती थी। दादी की एक आवाज पर छह जन दौड़े आते थे सोचता हूँ वो आठ जन कैसे तीन कमरों में समाते थे।
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