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#ठग
11 poems
काजू की विदेश यात्रा
Swapnil Saurav · 2 min read · 295 reads
१० दिन का फ्री टूर पैकेज था ईमेल में लिखा और साथ में उनको प्लेन का टिकट भी था मिला पूरा मामला था किसी टूर कंपनी का प्रचार
Abstract
ठग
Navin Madheshiya · 1 min read · 239 reads
मैं चला था लोगों को ठगने पर यहां लगा है भावों का बाजार अब पुनः वापस आकर बैठ गया अब खुद को ठगा महसूस कर रहा हूं
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भोर
Shailaja Bhattad · 1 min read · 24.1K reads
छोड़ चुका अब कठपुतली की डोर।
Abstract
आखिर क्यों ?
Bhawna Kukreti · 1 min read · 22.6K reads
कोई किस झूठे अभिमान को पोषित कर रहा है ? और आखिर क्यों कर रहा है ?
Abstract
ये सपने!
Dr.Ankit Waghela · 1 min read · 111 reads
खग कुछ..है रात भर घूमे ठग कुछ...है रेत में भोर बूने हर कूचे हर कसबे के दीवाने पुरपेच
Abstract
हर बात लिख
Vandana Singh · 1 min read · 6.8K reads
देव की माया नगरी में अपनी क्या औकात लिख।
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