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#तट
22 poems
नदी की कहानी,उसी की जुबानी
Kumar Kishan · 1 min read · 278 reads
विभिन्न नामों से मैं पुकारी जाती हूँ, कभी कहीं मैं देवी रूप में पूजी जाती हूँ
Classics
सब तेरे जैसे होते !
Krishna Khatri · 1 min read · 451 reads
रखते ख्याल पर्यावरण का ! हो जाती मैं निहाल !
Abstract
किसका किससे प्रेम ?
नीलम पारीक · 1 min read · 384 reads
ये तो धरा ही है जो रखती है धैर्य और उसी विध्वंस से एक दिन फूट पड़ते हैंकुछ नवांकुर
Abstract
बूझो तो जानूं
Dr Alka Mehta · 2 min read · 465 reads
अब जानो कैसे हुआ मेरा उद्गम, कैसे आयी हूँ धरती पर, सवर्प्रथम बसी थी बर्फीले पर्वतों
Inspirational
बहती नदिया
राही अंजाना · 1 min read · 413 reads
जोड़ देती हूँ जिस पल दो किनारों के तट लोगों के लिए फिर तटिनी बन जाती हूँ मैं
Inspirational
अंधेरों के मसीहा
Sandeep kumar Tiwari · 1 min read · 397 reads
उस तट पे अक्सर लोग प्यासे मर जाते हैं जिस तट से होकर समंदर बहा करते हैं
Others
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