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#तलब
44 poems
तलबगार
Poonam Kaparwan · 1 min read · 76 reads
राज़दार बना लीजिए!
Others
चल आ एक हो जाएँ फिर से
Praveen Gola · 1 min read · 235 reads
क्यूँ ना अपनी उलझने सुलझायें फिर से ?
Romance
इश्क़ निभाया है
Mansi Makkad · 1 min read · 178 reads
फिर कैसे अल्लाह के दर से दफ़ा हो जाऊँ।
Romance
रातभर
Vijay Kumar उपनाम "साखी" · 1 min read · 267 reads
चाँद को देख़ा, सितारों को देखा अँधरो में खोया तो बहुत था रात भर तुमसे मिलने की तलब इस
Romance
कुछ यूँ बदले है हम तुम
Arpita Sahoo · 1 min read · 432 reads
कुछ बदला सा ये मौसम का मिजाज है, कुछ बदला सा है इन हवाओं का ये रुख।
Abstract
चाय और वो
Antra Bhilatiya · 1 min read · 408 reads
इन्हीं लम्हों में हमारी आँखें मिल जाया करती थी, भले ही दो पल के लिए ही सही ये दुनिया उन्हीं में सिमट जाती थी
Romance
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