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#दम
127 poems
वक़्त से..
Mohanjeet Kukreja · 1 min read · 297 reads
हर ग़लत बात पर लोग तेरा ही नाम लेते हैं, क्यों इतने इल्ज़ाम लिए फिरता है अपने सर ?
Drama
मिलकर राम बने
gyayak jain · 1 min read · 214 reads
हर सांस में गिनती राम की हो तब साथ मिले रघुराम कहे।
Abstract
एक नया सवेरा
Swati Sharma · 1 min read · 183 reads
हर जगह जो है अधिकार तुम्हारा जंगल काटकर घर बनाते जा रहे हो,
Tragedy
लालबत्ती वाले नेताजी
Dr Lalit Upadhyaya · 1 min read · 385 reads
आंखें आज भी हो जाती नम क्योंकि हम पढ़े लिखे हैं कम, साथी ने कहा मत कर गम नेतागिरी में
Others
क्योंकि शायद पापा
Neelesh Ahirwar · 1 min read · 480 reads
कुछ समय साथ रह कर अतीत के पन्नों में चली जाती है।
Others
विकल्प
Shantanu Singh · 2 min read · 222 reads
देश की बेटियां नहीं होती हैं, क्यूंकि और कोई विकल्प भी नहीं है।
Drama
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