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#दीया
61 poems
एक और एक ग्यारह
Prem Bajaj · 1 min read · 144 reads
रोशनी को फैला कर, अंधेरे को कर दे नौ दो ग्यारह।
Abstract
पहाड़ पर साँझ
Kanchan Prabha · 1 min read · 417 reads
आज भी मन चक्षु के किसी कोने में पहाड़ पर साँझ की खामोशी व्याप्त है।
Abstract
मैं नहीं हूँ
Vandana Singh · 1 min read · 300 reads
ये दिवाली चश्मदीद गवाह है मेरी नाकामियों की।
Drama
अधूरी समझ
Diksha Bishen · 1 min read · 963 reads
मैं आशा की लड़ियाँ पिरोती रही इक दीया सी भी ज्योति न मुझको मिली।
Drama
दिवाली का दीपक
Kumar Naveen · 1 min read · 408 reads
आप हँसे जीवन में हर पल बीएस यही दुआ हम करते हैं इस वर्ष दिवाली का दीपक सप्रेम समर्पित करते हैं
Abstract
दीया
Anjuman Mansury · 1 min read · 146 reads
और तब आलोकित हो जाता है मेरा सारा तम मय जीवन...।
Drama
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