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#दूब
7 poems
प्रभात
Kulwant Singh · 1 min read · 277 reads
मद्धम बहती शीतल बयार विहग चहकना मन भिगोती।
Classics
खेल का मैदान
sunita mishra · 1 min read · 602 reads
कोई है दल हारता यहाँ कोई दल है जीतता यहाँ।
Drama
दूब सी औरते
Bhawna Kukreti · 1 min read · 263 reads
मासूमियत के नकाब में छिपा लेती हैं अपना सारा गुबार।
Drama
संभावनाओं के बीज..
नमिता गुप्ता 'मनसी' · 1 min read · 348 reads
"संभावनाओं के बीज".. अंकुरित होंगीं आशाएं.. फिर..उगेगी "प्रेम-दूब"
Inspirational
बरगद
Dr. Anu Somayajula · 1 min read · 302 reads
यह जो बरगद का पेड़ तना है - ना जाने कब से यूं ही खड़ा है थकता नहीं यह!
Abstract
वट नहीं, मैं दूब होना चाहता हूँ
अच्युतं केशवं · 1 min read · 271 reads
बिन बताये सिर्फ बातों में लगाये वस्त्र सारे कर चुकी तन से अलग वो डाँटती पुचकारती बहला रही है नग्नता को भूलकर वह हँस रहा है माँ उसे उबटन लगा नहला रही है...
Abstract
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