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#दोष
116 poems
कलयुगी बन जाइये
अजय एहसास · 1 min read · 183 reads
खुद न बंधना नियम से, बस दूसरों पर थोपिये तलवार नियमों की चले, जो माने उसको भोकिये खुद पर जो लागू भी न हो, कानून ऐसे बनाइये कुछ बनो या ना बनो पर, कलयुगी बन जाइये।।
Inspirational
इसे इत्तेफाक ही कहिए
Jaya Tagde · 1 min read · 357 reads
इसे मंज़िल का दोष न कहिए इसे इत्तेफ़ाक ही कहिए।
Drama
नदी की आत्मकथा
Uma Shukla · 1 min read · 188 reads
रूप धारण कर नहरों का करती कृषिक्षेत्र को सिंचित
Others
"राम तुम्हारे आगमन पर"
चेतन "अंस" · 1 min read · 284 reads
मैं तो बेबस हूं नादानों को फुलझडियां मासूम जिंदगियों का असल कौन बताए धर्म आइना है
Abstract
आत्मकथ्य
Neerja Sharma · 1 min read · 214 reads
मेरे प्रयास तुम्हें बचाने के होते तुम मुझ पर दोष डाल चलते
Others
मन्त्रमुग्ध गढ़वाल
Mahavir Uttranchali · 1 min read · 171 reads
निर्धनता के पश्चात भी यहाँ व्याप्त है / संतोष पर्याप्त जंगलात के कंदमूल शद्ध हवा और
Abstract
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