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#धरा
418 poems
ढ़लता सूरज
Ratna Pandey · 1 min read · 191 reads
किंतु जब मैं ढलता हूँ, मुझे कोई नमन नहीं करता है, थके हुये मेरे तन को, कोई आर्ध्य नहीं देता,
Others
सब धरा रह जाएगा
None None · 1 min read · 1.4K reads
इस धरा को नरक कर के स्वर्ग में सीढ़ी लगाना औरों के लिए काटें बो कर, फूल की इच्छा जताना....
Inspirational
“सारी धरा का नीर अमृत हो जाये”
Vishal Agarwal · 1 min read · 13.2K reads
सारी धरा का नीर अमृत हो जाऐतू मुस्कुरा भर दे तो उल्फ़त हो जाऐनयनों में बसी मेरे तेरी ही तो सूरत है
Others
नदी की प्रार्थना
Nitu Arora · 1 min read · 408 reads
प्रकृति के नियमों का पालन करना मेरे जल को साफ रखना।
Drama
नदी हूँ मैं बहती जाती हूँ
Pooja Yadav · 1 min read · 257 reads
प्रेम समर्पण दान का मैं भाव सिखाती हूँ।
Abstract
सुना तुमने
Anita Sudhir · 1 min read · 201 reads
दो जिस्म एक जान हो रहे हम हाँ यही प्यार है।
Romance
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