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#धार
84 poems
मैं नदी मुखातिब हूँ
Rabindra Mishra · 1 min read · 185 reads
कोई नहीं है अपनी, अपनों की हाय में लूट गयी हूँ।
Drama
शब्द की तलवार
Shakun Agarwal · 1 min read · 224 reads
जो चुभे सीधे से दिल में जख्म भरते भी नहीं।
Abstract
इश्क़
Amrita Singh · 1 min read · 135 reads
दुआ बनकर सुर्ख़ लबों पर, जो निखरने लगे
Others
बोलो क्या मैं वृध्द हुआ?
Shashi Dwivedi · 1 min read · 101 reads
ऋतुओं से बातें करता।
Others
उधेड़बुन
VIKAS KUMAR MISHRA · 1 min read · 489 reads
कत्ल अहसासों के मेरे, जरा फिर कर दोगे ?
Abstract
हैं अजनबी इस देश में
VIVEK ROUSHAN · 2 min read · 533 reads
नफरत के कारोबार करने वाले लोगो को बता दो कि उनकी नफरत से ज्यादा धार हमारी मोहब्बत में है।
Action
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