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#नमक
49 poems
मुक्तक
Dr Narendra Kumar Patel · 1 min read · 133 reads
हमारे ज़ख़्म पर नमक लगाते चले गए।
Abstract
प्यार करना है तो संभल जाना
Sonam Kewat · 1 min read · 8K reads
प्यार वो नमक है जिससे घाव और जल जाता है, और स्वाद बने तो जीभ पाने को मचल जाता है।
Romance
आज़ादी
Gulabchand Patel · 1 min read · 252 reads
कस्तूरबा से करवाया श्रम साबरमती मे बनाया आश्रम बचपन में चबाये चने इंग्लैंड जाकर बेरी स्टार बने
Inspirational
हम से छुपाता रहा
Shyam Kunvar Bharti · 1 min read · 299 reads
हसीन होगा सफर साथ चलकर तो देखो दोस्त बनकर सरे राह कांटे बिछाता रहा।
Abstract
सूरज का सिन्दूर !
S Ram Verma · 1 min read · 543 reads
पांव ना टिके धरती पर और वो बस उड़ती रहे हवाओं में !
Romance
देश का नमक
Vijay Kumar उपनाम "साखी" · 1 min read · 388 reads
इसके बिना नहीं कोई दूजा है ये नमक ही ख़ुदा की हमारी बंदगी है।
Drama
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