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#नरक
23 poems
स्वर्ग
हरीश सेठी 'झिलमिल' · 1 min read · 429 reads
शायद कभी मिल जाए स्वर्ग की असली परिभाषा।
Abstract
इश्क़ है !
S Ram Verma · 2 min read · 2.3K reads
इश्क़ है; सिलवटों से भरे बिस्तरों में, अपनी प्रेयषी की खुशबू को ढूँढना !
Abstract
थोड़ा-सा
अशोक वाजपेयी · 1 min read · 174 reads
वही थोड़ा-सा आदमी जो बूढ़ों के पास बैठने से नहीं ऊबता जो अपने घर को चीजों का गोदाम होने से बचाता है,
Inspirational
पारिवारिक कलह
भाऊराव महंत · 1 min read · 429 reads
कह तुच्छ निज चीत्कार में। जब हो कलह परिवार में।।
Tragedy
विधवा जीवन की दुश्वारियाँ
dr vandna Sharma · 1 min read · 7K reads
फिर भी ना जाने क्यों करवाचौथ का व्रत वो रखती थी, शायद उसे नयी सुबह आने का इंतज़ार था, या सच कुछ और था
Tragedy
स्वर्ग
हरीश सेठी 'झिलमिल' · 1 min read · 279 reads
धर्मग्रंथ, सत्संग, बड़े बुजुर्ग अक्सर समझाते हैं महत्त्व स्वर्ग का वे बताते हैं
Abstract
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