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#नव
87 poems
सरस्वती
Rekha Shukla · 1 min read · 399 reads
वर दे वीणावादिनी वर दे ! ----- सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"
Classics
नव प्रभात
monika kakodia · 1 min read · 358 reads
बिसरा सारे अंधियारे को नव प्रकाश से नाता जोड़ें।
Abstract
कलमकार
Nimisha Singhal · 1 min read · 338 reads
एक नए रूप के साथ बहरूपिया कलमकार।
Abstract
समय चक्र चलता रहा( दोहा -गीत )
कल्पना रामानी · 1 min read · 416 reads
समय चक्र चलता रहा, घड़ियाँ भी गतिमान हौले हौले आ गया, नया साल मेहमान।
Others
नवा साल मंगल होय, दुइ हजार बी
अजय एहसास · 1 min read · 425 reads
नवा साल मंगल होय, दुइ हजार बीस।
Drama
पुत्री वियोग
संदीप सिंधवाल · 1 min read · 360 reads
बिटिया पराया धन है, फिर क्यों रोता बाप। ये चुभते जज्बात हैं, नहीं समझते आप।।
Others
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