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#नीर
74 poems
“सारी धरा का नीर अमृत हो जाये”
Vishal Agarwal · 1 min read · 13.2K reads
सारी धरा का नीर अमृत हो जाऐतू मुस्कुरा भर दे तो उल्फ़त हो जाऐनयनों में बसी मेरे तेरी ही तो सूरत है
Others
आ मितवा
Manju Saraf · 1 min read · 277 reads
फिर बह जाने दे इनको, और जरा हम खुलकर रो लें,
Romance
नीर से भरपूर
GUDDU MUNERI "Sikandrabadi" · 1 min read · 283 reads
तुम हो जीवन का हर रूप तुम हर प्यास का पानी हो।
Abstract
गंगा के उद्गार
Pratibha Garg · 1 min read · 437 reads
प्रण मेरा पुनः राष्ट्र में अमृत सोम बहाना।
Abstract
नदी की आत्म कथा
Neena Ghai · 1 min read · 535 reads
मिल जाती हम भव्य सागर में पूर्ण होती है आस पिया मिलन की l
Abstract
कुछ लम्हें
Vijay Kumar उपनाम "साखी" · 1 min read · 383 reads
पर आज भी तेरे पास होने के, हमें हर पल ही ख्याल आते हैं।
Abstract
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