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#पहर
32 poems
रोज डे
Indraj meena · 1 min read · 230 reads
बरसों से इश्क किया तुमसे तुम बादल बनके बरस जाना बैचेन निगाहें तरस ही गई फिर हर पल मिलना तुम मुझसे।
Drama
तेरे दर्शन पाऊँ
Tanmay Mehra · 1 min read · 312 reads
भोर होने से पहले हर रोज तेरे दर्शन पाऊँ।
Romance
आलम
Asmita prashant Pushpanjali · 1 min read · 377 reads
कोइ नहीं भाता था इस दिल को तेरी ही यादों में हर दम डुबे होते थे।
Romance
मन की बात
Neerja Sharma · 1 min read · 124 reads
बेबाक मन की ही करती नहीं ढूँढती अब कोई सहारा मेरी कलम जीवन भर का आसरा।
Abstract
पथिक की प्रकृति
Archana Verma · 1 min read · 480 reads
मैं तकता रहा उसकी बाट अक्सर एक दिन मैंने खुद को समझाया।
Abstract
हुस्न का इताब
Shailesh Soni · 1 min read · 258 reads
खोए रहते थे मुझमें, जो आठों पहर l
Romance
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