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#पीठ
43 poems
एक उलझन
Dr Alka Mehta · 2 min read · 349 reads
कैसे सुख-चैन से अड़ोसी-पड़ौसी सोते हैं, हम अपने सवालों पे रात भर रोते हैं,
Drama
स्कूल बैग का भार
Vivek Verma · 1 min read · 8.7K reads
माँ! बस्ते के बोझ तले मेरा बचपन दब रहा है,
Children
जिंदगी की एक शाम
Archana kochar Sugandha · 1 min read · 382 reads
एक शाम जिंदगी, जिंदगी से टकरा गई देखकर इसके रंग-ढंग वह भी घबरा गई।
Abstract
कुत्तों का शत्रु
Vigyan Prakash · 1 min read · 231 reads
जहाँ सोते थे कई सितारे उसके साथ और चाँद दिया करता था पहरा सारी रात।
Tragedy
"के सिवन"(इसरो चीफ)
प्रियंका दुबे 'प्रबोधिनी' · 2 min read · 215 reads
हाँ ! प्रियवर ये वादा मेरा, मैं तुझसे मिलने आऊँगा।
Others
रोजगार की तलाश
Jeevan singh Parihar · 1 min read · 432 reads
पीठ पर बैग और हाथ में रिज़्यूम लिये, जाएगा हर दफ़्तर की दहलीज पर।
Drama
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