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#बम
15 poems
घिरे थे जो बादल
Abhilasha Chauhan · 1 min read · 436 reads
चमका जो सूरज, डरे थे ये बादल। घाटी से अब तो, छंटेंगे ये बादल।
Abstract
होली का त्योहार
Pritam Pandey · 1 min read · 435 reads
ये पर्व हैं प्यार और उन्नति का बोली जुआ में ना बरबाद करो।
Abstract
दुविधा
KAVITA MUKESH · 1 min read · 231 reads
मेरे बच्चों कैसे सहलाऊँ तुम्हारी पीठ जब मैं ही हूँ दो पाटों के बीच और तुम नतमस्तक
Others
संस्कृति का लोप
Mahak Singh · 1 min read · 293 reads
नहीं खोफ अब विश्व विधाता ईश्वर का भी कोई।
Tragedy
फ़ौजी देवरवा
अमित प्रेमशंकर · 1 min read · 221 reads
बन जाई तोहरो देवरवा इ फौजी बोला ए भौजी 2
Inspirational
युद्ध या राजनीति
Mukesh Chand · 1 min read · 313 reads
वाद विवाद का संवाद कर के एक दूसरे पर छींटाकशी करते।
Abstract
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