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#बरस
27 poems
नए साल
Sapana Vijapura · 1 min read · 233 reads
मेरे दोस्त जो दूर दूर जाके बैठ गये है उन सबसे मुलाकात हो जाये अबके बरस।
Abstract
पदचिन्ह
Jiwan Sameer · 1 min read · 310 reads
छलकपट के बूंदों से अनगिनत सांचे में ढाल गये समर्पण की बंद देहरी से सर्वस्व मेरा छल गये
Others
रहो तैयार !
Suresh Kulkarni · 1 min read · 23.1K reads
हम तैयार ही नहीं रहते ! सम्हलना सँवरना काम अपना है !
Abstract
चुभन
Alok Singh · 1 min read · 263 reads
वो दरिया सूख गया, देकर बादलों को अपना पानी ऐ आँखें तू जरा खुल कर बरस
Others
जल की पाती
Sanjay Verma · 1 min read · 364 reads
सहेजना ना जानता इंसान इसलिए तरस जाता।
Inspirational
पांचों ऋतुएँ!
S Ram Verma · 1 min read · 163 reads
तुम्हारे आलिंगन में मैं होती हूँ और मुझ पर
Romance
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