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#बहू
65 poems
"नेग वेग सब छोड़ो रे"
अंजु लता सिंह · 1 min read · 428 reads
नव आगत सुखप्रद बातों को लाओ जो हर्षाती हों।
Drama
कैसे खेलूँ होली
Ranjana Mathur · 1 min read · 275 reads
खेलूंगी होली उस खातिर था जो मेरे मन का शृंगार।
Drama
खुद को देखो
Garima Kanskar · 1 min read · 283 reads
उनकी प्यारी बहू बनने में हमने अपने आपको भुला दिया
Others
कैसी लगी
Shagufta Quazi · 1 min read · 346 reads
वह एक इंसान नहीं कोई वस्तु हो जैसे, पूछा जाए कैसी लगी ?
Tragedy
माँ की बेटी
Pragati Chandrakar · 1 min read · 511 reads
ना बेटी ना बेटा सिर्फ तुमने दोनो सा पाला है, ना छोड़कर जाऊंगी फैसला मैंने कर डाला है।
Drama
५ गज की नहीं, ५ फुट की साड़ी
SIJI GOPAL · 2 min read · 2.8K reads
तिरस्कार और लांछन तो जैसे मेला है, आत्मसम्मान की अर्थी निकली हो जैसे, कुड़े में पड़ा एक बेसाहरा टुकड़ा हूं वैसे।
Tragedy
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