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#बीज
123 poems
1-घायल है पर्यावरण
sunita mishra · 2 min read · 243 reads
सूर्य की किरणें ऊष्मा देकर पर्यावरण को देती बल भी।
Inspirational
फ़सल दिल में खड़ी हो जैसे
आकिब जावेद · 1 min read · 472 reads
बीज़ नफ़रत के दिलों में न रखो इक फ़सल दिल में खड़ी हो जैसे।
Drama
धरती और माँ
Dr Manisha Sharma · 1 min read · 280 reads
अपने कदमों से नोचता रहता है वो मिट्टी जिसने थामा है उसे।
Drama
मैं बूँद हूँ
Vinod Kumar Rai · 1 min read · 210 reads
मैं मूल हूँ सृष्टि करने की शक्ति रखता हूँ।
Abstract
ख़ुशी के बीज
Deepti Gupta · 1 min read · 287 reads
बाक़ी छोड़ देती हूँ ज़माने के लिए ख़ुशी ढूंढती नहीं मैं मुस्कुराने के लिए।
Drama
ये ज़रूरी है
Nirupama Naik · 1 min read · 468 reads
उनके मन की स्थिति हमेशा परिजनों के व्यवहार पे निर्भर करती है
Inspirational
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