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#भ्रम
109 poems
कोई मिट्टी बता रहा है कोई
राही अंजाना · 1 min read · 278 reads
जिस्म के आकार के इतने सन्दूक बना रहा है,
Abstract
इच्छाएं
Geeta Upadhyay · 1 min read · 196 reads
एक पूरी होती है तो पीछे से अनगिनत आती है
Others
माँ लौट आ माँ
कलम की आवाज मिथलेश सिंह मिलिंद · 1 min read · 504 reads
अब भी जैसे फिरती तेरी, उँगली मेरी अंखियों पर।
Abstract
कांच से रिश्ते
Husan Ara · 1 min read · 270 reads
दूर से देखो मिलो, तो ये चमकते हैं पास जितना जाओ, उतना भ्रम टूट जाता है।
Drama
स्याह परतों के नीचे
Sudha Singh 'vyaghr' · 1 min read · 262 reads
पंथ में तुम किसी के न कंटक बिछाओ, चले उस पंथ तुम जो, तुम्हें वह चुभेगा
Inspirational
सार्थक जीवन
Sonia Miglani · 1 min read · 794 reads
जल की नन्ही नन्ही बूंद और प्यार के मीठे मीठे बोल बने हम.. और हो सके तो तोड़ दें...
Inspirational
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