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#मीत
81 poems
दिलबर उसे तुम मान लो
Vijay Kanaujiya · 1 min read · 238 reads
हो गई है दिल्लगी दिलबर उसे तुम मान लो।
Romance
स्त्री
Chanchal Pahuja · 1 min read · 209 reads
दुखों की हो नहीं छाया दिखे आलोक धरती पर, प्रबल हो तमस का आकार तो स्त्री दीप बन जाती।
Inspirational
वेदना
Ashok Kumar Gound · 1 min read · 302 reads
जो मेरा नही, ओ मेरा है मेरा सांझ है सवेरा है रिश्तों की डोर से भी गहरा, बंधने वाला फेरा है।
Tragedy
ये तो मैं ही हूँ !
Rashmi Prabha · 2 min read · 278 reads
आज मैंने मन की ऊँगली पकड़ कर और मन ने मेरी ऊँगली पकड़ उधर गए जहाँ डर की बंदिशें थीं ...
Horror
नेह समन्दर
नीलम पारीक · 1 min read · 284 reads
ओ मेरे मन मीत।
Romance
सपने की राजकुमारी
अमित प्रेमशंकर · 1 min read · 432 reads
उठ बैठ सोचा कुछ अपने देख रहा था रे मैं सपने।
Romance
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