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#मृग
13 poems
भ्रम
हरीश सेठी 'झिलमिल' · 1 min read · 455 reads
बिम्ब के भ्रम में ही कुत्ता रोटी गँवाता।
Others
कस्तूरी
अजय '' बनारसी '' · 1 min read · 294 reads
प्राण पखेरू उड़ जाते हैं रह जाती है केवल कस्तूरी की मृगतृष्णा।
Abstract
हिन्दी सावन शिव भजन 1- बाबा बैजनाथ के धाम मे |
Shyam Kunvar Bharti · 1 min read · 97 reads
जीवन सफल हो जाएगा बड़ी शक्ति है बाबा के वरदान में चलो सब कावर लेके बाबा बैजनाथ के धाम
Inspirational
नीरवता
Shweta Mangal · 1 min read · 281 reads
और मैं डूबती ही जाती हूँ इस नीरवता में जैसे तूफान में फंसी एक कागज की नाव
Others
प्रकृति
Kulwant Singh · 1 min read · 139 reads
अनुपम सौंदर्य समेटे दृष्य, लोचन बसता, हृदय लुभाता।
Abstract
मृग-मरीचिका
सुशान्त झा अवलोकित · 1 min read · 6.8K reads
अब नहीं है निशान मात्र भी संवेदना के उस काले टीके का, जो लगाया गया था तुम्हें बुरी नज़र से बचाने को
Drama
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