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#री
5 poems
वाह री आशिकी
ARVIND KUMAR SINGH · 1 min read · 11.9K reads
वाह री आशिकी तूने जाने कितनों को बरबाद किया!
Abstract
वाह री दुनिया
yogita singh · 1 min read · 124 reads
वो गए थे बड़ी शान से इस गांव से उस शहर की ओर , जब खाई ठोकरें तो चल पड़े गांव की ओर।
Abstract
ओ री वुमनिया
सोनी गुप्ता · 2 min read · 265 reads
जल्दी से बना ली चाय और साथ में कुछ पकौड़े भी,
Abstract
चल री सजनी
Dr.Purnima Rai · 1 min read · 113 reads
चल री सजनी छोड़ सब कुछ ना तेरा कोई साथ है।
Romance
माता राणी का भजन
OM Maind · 1 min read · 571 reads
मैं बोला सारा सोच समझ कर अब मैं छोटों नहीं बड़ा गया हूँ।
Abstract