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#रुत
5 poems
सावन
SANJAY SALVI · 1 min read · 329 reads
काले काले मेघा तू ऐसे कैसे बरसा, तन तो मेरा भीग गया मन अभी भी प्यासा,
Romance
देखो आई रुत मस्तानी
Razia Mirza · 1 min read · 173 reads
बिजली चमकी बादल गरजे, रिमझिम रिमझिम बरख़ा बरसे। आई एक तूफ़ानी। देखो आई रुत मस्तानी।
Others
बासन्ती परिवेश
Dr Ranjana Verma · 1 min read · 186 reads
ऋतु ने करवट ली धरती ने बदला अपना वेश , ली अंगड़ाई फूलों ने है बासन्ती परिवेश । महक
Others
सखि री रुत होली की आई
Karuna Dashora · 1 min read · 201 reads
आई फागुन रुत चहुँ दिशि छाई तो जौबन ले अँगड़ाई सखि री रुत होली की आई।
Abstract
आशिकी तेरी खुद्दारहै
Ratna Kaul Bhardwaj · 1 min read · 414 reads
एहसास शायद होगा तुम्हें क्या होते है लम्हे कयामत के
Tragedy